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  • 2019-04-03 22:02:27

अप्रैल माह में करें ये जरूरी कृषि कार्य, मिलेगा अच्छा उत्पादन

इस महीने रबी की फसलें तैयार हो जाती हैं और किसान जायद की फसलों की तैयारी कर रहे होते हैं, तापमान बढ़ने और हवाओं के चलने से इस समय फसलों की खास देखभाल करनी होती है। इस समय गन्ने की फसल को ज्यादा पानी की जरूरत होती है, सिंचाई करने के बाद फसल की निराई गुड़ाई करनी चाहिए, क्योंकि पानी से कई तरह के खरपतवार भी उग देते हैं, जिन्हें उखाड़ देना चाहिए। निराई गुड़ाई के बाद उसमें उर्वरक की सही मात्रा डालनी चाहिए। इस महीने खेत खाली होने पर मिट्टी की जांच जरूर कराएं। तीन वर्षों में एक बार अपने खेतों की मिट्टी परीक्षण जरूर कराएं ताकि मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों (नत्रजन, फास्फोरस, पोटेशियम, सल्फर, जिंक, लोहा, तांबा, मैंगनीज व अन्य) की मात्रा और फसलों में कौन सी खाद कब व कितनी मात्रा में डालनी है, का पता चले का पता चले। मिट्टी जांच से मिट्टी में खराबी का भी पता चलता है ताकि उन्हें सुधार जा सके। जैसे कि क्षारीयता को जिप्सम से, लवणीयता को जल निकास से तथा अम्लीयता को चूने से सुधारा जा सकता है। ट्यूबवैल व नहर के पानी की जांच भी हर मौसम में करवा लें ताकि पानी की गुणवत्ता का सुधार होता रहे व पैदावार ठीक हों। मिट्टी की सेहत ठीक रखने के लिए देशी गोबर की खाद या कम्पोस्ट बहुत लाभदायक है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में गोबर की खाद का प्रयोग कम हुआ है। अप्रैल में गेहूं की कटाई और जून में धान/मक्का की बुवाई के बीच 50-60 दिन दिन खेत खाली रहते हैं इस समय कुछ कमजोर खेतों में हरी खाद बनाने के लिए ढैंचा, लोबिया या मूंग लगा दें और जून में धान रोपने से एक-दो दिन पहले या मक्का बोने से 10-15 दिन पहले मिट्टी में जुताई करके मिला दें इससे मिट्टी की सेहत सुधरती है। इस तरह बारी-बारी सभी खेतों में हरी खाद फसल लगाते व बनाते रहें। इससे बहुत लाभ होगा तथा दो मुख्य फसलों के बीच का समय का पूरा प्रयोग होगा। इस महीने करें इन फसलों की बुवाई साठी मक्का की पंजाब साठी-1 किस्म को पूरे अप्रैल में लगा सकते हैं। यह किस्म गर्मी सहन कर सकती है और 70 दिनों में पककर एक कुंतल तक पैदावार देती है। खेत धान की फसल लगाने के लिए समय पर खाली हो जाता है। साठी मक्का के छह कि.ग्रा. बीज को 18 ग्राम वैवस्टीन दवाई से उपचारित कर एक फुट लाइन में व आधा फुट दूरी पौधों में रखकर प्लांटर से भी बो सकते है। इस मक्का के विल्कुल कच्चे भुट्टे बिक जाते हैं जोकि होटलों में सलाद, सब्जी, अचार, व सूप बनाने के काम आते हैं। यह फसल 60 दिन में तैयार हो जाती है और निर्यात भी की जाती है। बेबीकार्न की संकर प्रकाश व कम्पोजिट केसरी किस्मों के 16 कि.ग्रा. बीज को एक फुट लाइनों में और आठ इंच पौधों में दूरी रखकर बोया जाता है।